Behold

Saturday, June 21, 2025

पाहि सियावर दूत सुजान

पाहि सियावर दूत सुजान 
राम नाम पर दास त्रास हर संकट विकट मथन हनुमान।।१।।

लवण सिंधु गो पद इव लांघा चले यथा राघव वर बाण।
अगम सिंधु भव किस विधि लांघू मारुत तनय करो तुम त्राण।। २।।

मति बल माता छलि व्याल की योजन शत कृत वदन महान।
क्षण क्षण डसे विषय विषधर लघु मरुं मूढ़ नित कर विषपान ।।३।।

गिरि त्रिकूट वर दुर्ग दहन कर  निशिचर वंश कुमुद कृत म्लान।
शैल तीन गुण देह दुर्ग रत जीव ग्रसा रावण अज्ञान।।४।।

दीन हीन सुग्रीव विभीषण दिया राम भुज बल वरदान।
मुझ सम दीन कौन कपि तुमको पाहि खड़ा कलि दण्ड को तान।।५।।

पिंगल नयन वदन पाटल सम देह धराधर हेम समान‌।
लिये राम रति भेषज सुंदर रुद्र रूप कपि भरो उड़ान।।६।।

No comments:

Post a Comment

Do Read

Mysterious Manglacharan